"The hardest of all is learning to be a well of affection,and not fountain,to show them that we love them,not when we feel like it,but when they do"

Monday, October 18, 2010

पर्दानशीं

वो नजरो से दूर खड़ी है ,

आँखों में सपने बेशुमार लिए पली है ,

उड़ने की इच्छा से विमुख न कर सका कोई उसे |
आज अपने पंख वह आजमाने  चली है |
रहती थी कैद एक दुनिया के कोने में ,
लहराती हवा में देखो अब कदम बढाए हैं |
एक झौका था काफी उस हसीं को,
पर्दा चेहरे से हट  चेहरा रूबरू हुआ |
शब्नमी निगाहें थी उन् पलकों के नीचे ,
गुलाब की पंखुड़ी से होंठ थे,
अपने काएदे में एक सलाम कर गयी,
जीत ले गयी दिल सबका वो पर्दानशीं ||






2 comments:

Makk said...

It is the same???

Alcina said...

Yes it is the same ..